समाज न तो अर्थसत्ता से चलता है न राजसत्ता से : गोविंदाचार्य

अरविंद झा निर्भय

देश-दुनिया के जाने माने थिंक टैंक और राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संयोजक के एन  गोविंदाचार्य आज ‘नर्मदा दर्शन यात्रा’ के दौरान होशंगाबाद से हरदा पहुंचे। 20 फरवरी को अमरकंटक से नर्मदा यात्रा और अध्ययन प्रवास की शुरुआत हुई थी। आज यात्रा का छठवां दिन है। 

होशंगाबाद के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गोविंदाचार्य ने कहा, पांच दिनों की  यात्रा में मैंने महसूस किया कि समाज न तो अर्थसत्ता से चलता है न राजसत्ता से। अनोखा समाज है जो समाजसत्ता से चलता है। इसमें  राजसत्ता का पूरक योगदान होता है। यह बात मुझे बरमान घाट के नजदीक लोगों को सड़क पर साष्टांग करते हुए  देखकर और साफ हो गया। इसी कड़ी में उन्होंने कहा कि संस्कारों से समाज चलता है, सत्ता से नहीं। 

प्रेसवार्ता के दौरान सवाल आया कि क्या राष्ट्र का स्वाभिमान खतरे में है?  इस सवाल के जवाब में गोविंदाचार्य ने कहा, स्वाभिमान को लेकर सावधानी की जरूरत है। भारत की सभ्यता मूलक यात्रा का जीवन काल बहुत लंबा रहा है। पिछले 200 सालों में भारत स्मृति भ्रंश का शिकार हुआ है। वहीं स्वाभिमान का संबंध स्व से होता है। भारत को भारत के नजरिए से देखने की जरूरत है। इसी क्रम में उन्होंने कहा, स्वाभिमान का संबंध आत्मविश्वास से है जिससे स्वालम्बन आता है। 

नर्मदा यात्रा और अध्ययन प्रवास की समाप्ति के बाद समाज और सत्ता के सामने रिपोर्ट रखने से संबंधित सवाल पर गोविंदाचार्य ने कहा, नर्मदा जी और उनके आस-पास की समस्याओं का समाधान 100 मीटर दौड़ नहीं है, मैराथन है। इसके लिए स्पीड से ज्यादा स्टेमिना की जरूरत है। 

धर्म सत्ता पर राजसत्ता के हावी होने के सवाल पर गोविंदाचार्य ने कहा, इसमें धर्मसत्ता की पहल जरूरी है। जो धर्मसत्ता के प्रतिनिधि हैं उनको पहल करना चाहिए। 

मध्यप्रदेश में शराब बंदी के सवाल पर गोविंदाचार्य ने कहा, नैतिक दृष्टि से शराब बंदी होनी चाहिए। इससे राजस्व को लेकर सोचे जरूरी नहीं। समाज का स्वास्थ्य भी सोचे। 

वहीं, गोविंदाचार्य ने होशंगाबाद के डोंगड़वारा गांव की महिलाओं से भी संवाद किया। ये गांव तब सुर्खियों में आया था जब यहां की महिलाओं ने अपने गांव के पुरुषों का शराब छुड़वाने के लिए कड़ाई की।  जिसकी बहुत सराहना हुई थी। इस गांव की कृष्णा देवी की अगुवाई में महिलाएं शराब बंदी की मुहिम में लगी हैं। गोविंदाचार्य ने शराब बंदी के खिलाफ उनके आवाज बुलंद रखने का आग्रह किया और महिलाओं की सराहना की।

 गोविंदाचार्य ने कहा, उनकी नर्मदा दर्शन यात्रा का उद्देश्य नव तीर्थ और नव देव दर्शन है। इसके लिहाज से डोंगड़वारा में नव तीर्थ और नव देव  दर्शन हुए। जो नया काम कर रहे नव देव हैं, जहां वो काम हो रहा नव तीर्थ है। 

बुधवार को नर्मदा दर्शन यात्रा और लोक संवाद के दौरान गोविंदाचार्य होशंगाबाद के सेठानीघाट, आंवली घाट, चांदगढ़ और हरदा जिले के टिमरनी सहित कई स्थानों पर गए।