होली अर्थात विस्मृत वैदिक नव वर्ष

ललित मिश्र

ललित मिश्र

भाषाविज्ञान के अनुसार “होली” शब्द “होला” शब्द से व्युत्पन्न है, जो कि पूर्णिमा के पश्चात भोर के ४ बजे की प्रथम होरा का समय है

स्प्ष्ट है कि “होला” से भी आशय पूर्णता के बाद प्रगति की ओर बढते हुए प्रथम उल्लास से होता है

ऋग्वेद से संबंधित ऐतरेय ब्राह्मण मे उदीच्योँ का उल्लेख है, ये उदीच्य लोग अपने स्थान को “होला” कहते रहे है, वर्तमान के गुजरात प्रदेश के पाटन क्षेत्र मे उदीच्य बहुतायत से प्राप्त होते है, शब्दिक साम्य के आधार पर यदि कहे तो हो सकता है कि पाटन क्षेत्र मे होली की शुरुआत होई होगी, किन्तु अलग से कोई साक्ष्य प्राप्त नही होता है.

शतपथ ब्राह्मण ( ६.२.२.१८ ) मे कहा गया है कि, संवत्सर की प्रथम रात्रि फ़ाल्गुन मास की पूर्णिमा होती है, तात्पर्य यह कि, वैदिक संवत्सर होली से शुरु होता रहा है और होली नये वर्ष को मनाने का त्योहार हौ, इतना विशाल और रंगीन नया वर्ष शायद ही कही और, किसी और सभ्यता मे मनाया जाता रहा हो

!! एषा ह संवत्सरस्य प्रथमरात्रिर्फ़ाल्गुनपूर्णमासी !! 

शतपथ ब्राह्मण ( ६.२.२.१८ )

ऐसे ही कथन हमे तांड्य महाब्राह्मण, गोपथ ब्राह्मण एवं तैत्तिरीय ब्राह्मण मे प्राप्त होते है

 होलीकोत्सव का प्राचीनतम मौर्यकालीन (२५० – ३०० वर्ष ईसा पूर्व ) पुरातात्विक अभिलेख, विन्ध्य पर्वत माला के अन्तर्गत कैमूर की छोटी – छोटी पहाडियों के मध्य बसे हुये रामगढ जो कि छ्त्तीसगढ के अम्बिकापुर जिलॆ मे आता है, से प्राप्त हो गया है, कहने का अर्थ यह कि होली त्योहार मनाने का सिल्सिला अनवरत चालू है

ऐतिहासिक साक्ष्यों मे राजा हर्ष की रत्नावली (लगभग ६०० ईसवी) मे एवं दन्डिन की दश कुमार चरित (लगभग ८०० ईसवी) मे प्राप्त होता है

किन्तु आजादी के बाद होली के अवसर पर शुरू होने वाले वैदिक संवत्सर के स्थान पर शक संवत्सर को प्रधान बना दिया गया, हिंदू संगठन भी इसी शक संवत्सर को अपनाकर चल रहे है।

(लेखक इंडोलाजी फाउंडेशन के संस्थापक हैं)

1 Comment

  1. Great and authentic information. Thank you Sir for enlighten us. Feeling v proud to know about origin of festival holi. ?

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